Mantra Chanting: मंत्र जाप मानव जीवन के लिये धर्म, मोक्ष, काम और अर्थ समस्त पुरुषार्थो की प्रदाता के रुप में सबसे अधिक शक्तिशाली माध्यम माने जाते है। मान्यता है कि ब्रह्मा का पहला स्वरुप सृष्टि उत्पत्ति की पहली ध्वनि ॐ से उत्पन्न हुई थी। इसलिये ॐ को ब्रह्मांड का पहला स्वर कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इसके जाप से शरीर में विशेष ऊर्जा का प्रवाह होता है यह ऊर्जा मनुष्य को ईश्वर से जोड़ती है।

सभी मंत्रों का स्त्रोत सार्वभौमिक ध्वनि ॐ से शुरु होती है। ॐ नमः शिवाय,ॐ रमाय नमः, ॐ विष्णवे नमः ॐलक्ष्मी नारायण नमः, ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नमः, आदि समस्त देवी देवताओं को समर्पित मंत्रों के साथ जोड़ने से मंत्र शुद्ध और परम शक्तिशाली हो जाते है।
ॐ नमः शिवाय है, भगवान शिव को समर्पित शक्तिशाली मंत्रः
सृष्टि संहारक देवाधिदेव महादेव, शिव को समर्पित मंत्र ॐ नमः शिवाय सृष्टि का सबसे पहला मंत्र माना गया है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र का जप करने से मनुष्य के भीतर आध्यात्मिकता का भाव जाग्रत होता है साथ ही समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है। पाप नाश, मनोकामना पूर्ण करने वाला पृथ्वी, अग्नि, वायु, आकाश से जुड़े अक्षरों को अपने में समाहित किये यह ॐ नमः शिवाय मंत्र जीवात्मा के शरीर औऱ ब्रह्मांड में संतुलन बनाये रखने में सक्षम है।

बुद्धि को संमार्ग पर ले जाने में सक्षम, गायत्री मंत्र
‘ॐ भूर्भुवः स्वः।तत्सवितुर्वरेण्यं।भर्गो देवस्य धीमहि।धियो यो नः प्रचोदयात्॥ जिसका अर्थ है कि हम परम तेजस्वी सूर्यदेव का ध्यान करते है, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर ले जाने के लिये प्रेरित करते है। ॠगवेद के तीसरे मडंल के 62 वें सूक्त में वर्णित गायत्री मंत्र महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित जगत रौशन करने वाले सूर्य देव को समर्पित सबसे प्राचीन शक्तिशाली मंत्रों में से एक है।

अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में दिये गये उपदेशों के महाग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता के 10 वें आध्याय के 35वें श्लोक में जगत विधाता श्रीकृष्ण ने स्वंय को गायत्री छंद के रुप में वर्णित करते हुये बताया है कि मैं ही सबसे सर्वश्रेष्ठ और शक्तिशाली हूँ और 18 वें अध्याय के 66 वें श्लोक में कहा है कि “सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरण व्रज’’ जिसका अर्थ है सब कुछ छोड़ कर मेरी शरण में आओ मैं ही सर्वशक्तिमान हूँ। यह मंत्र आत्मसमर्पण के भाव को विकसित करते हुये व्यक्ति को कर्मयोग और भक्तियोग के मार्ग की ओर अग्रसरित करता है।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय ।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥
जटाकटा हसंभ्रम मन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम:।।
ॐ लक्ष्मी नारायण नमः, ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नमः
जगत विधाता श्रीकृष्ण, जगत पालक श्री हरि, सियाराम भक्त हनुमान जी, देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित समस्त मंत्र परमेश्वर को अंतरात्मा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करते है।
…..समाप्त…..
(पाठक इस लेख में लिखित तथ्यों को अपने मनोभावों के अनुरुप ही ग्रहण करें)
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3 Comments
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