Nauka Vihar Utsav: जगत विधाता श्री कृष्ण की लीलायें उनके जन्म लेते ही अठखेलिया लेने लगी थी । उनमें से यमुना की नौका विहार लीला भावपूर्ण प्रेम प्रसंगों में एक है। मान्यता है कि जब एक बार राधारानी और गोपियां दही और मक्खन से भरे मटकों को लेकर यमुना पार जाने के लिये लौट रही थी तब उन्हें यमुना नदी को पार कराने के लिये कोई नाविक नही मिल रहा था।

तभी श्री कृष्ण गोपियों के हाथों में दही और मक्खन से भरे मटकों को देखकर अपना छालिया रुप धर लेते है। और नाविक बनकर गोपियों और राधारनी के पास पहुँचते है। गोपियां और राधारानी श्रीकृष्ण को नाविक समझ यमुना नदी पार कराने का आग्रह करती है। जिसको स्वीकार करते हुये नांव से यमुना पार कराने के बदले श्रीकृष्ण मोल के रुप में गोपियों से दही और मक्खन से भरे मटकों की मांग करते है। जिसे गोपियां और राधारानी मान कर श्रीकृष्ण संग नांव में विराजित हो जाती है।
नौका में श्रीकृष्ण राधारानी का मिलन, प्रकृति सौदंर्य का प्रकटीकरण
जैसे ही नांव नदी के बीचों बीच पहुँचती है। श्रीकृष्ण अपनी चंचलता को प्रकट करते हुये नांव रोककर भूख और नींद का बहाना करने लगते है। यमुना नदी की बीच मझधार और आंधी, तूफान कड़कती बिजली के डर से गोपियां सहम् जाती है। नदी के बीचोबीच डगमगाती नांव में श्रीकृष्ण निश्चिंत होकर नाविक रुप में ही मुरली बजाना शुरु कर देते है।

जिससे राधारानी उनकी मुरली की धुन से श्रीकृष्ण के छलिया रुप को पहचान लेती है। उस क्षण दोनों के प्रेम का यह अद्भुद मिलन प्रकृति के मनोभावों को चरमोत्कर्ष पर पहुँचा कर निश्छल प्रेम के सौंदर्य को प्रकट करता है। आध्यात्मिकता और प्रेम से परिपूर्ण प्रदर्शित करता यह मनमोहक दृश्य यह बताता है कि जब आत्मीय प्रेम की पराकाष्ठा होती है। तब मांझी बनकर संसार रुपी भवसागर से श्रीकृष्ण पार लगाते है।
जे.के. मंदिर में नौका विहार उत्सव में धरती पर स्वर्ग जैसा अद्भुत दृश्य
पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण और राधारानी के नौका में इस अद्भुत मिलन को हिन्दू धर्म में जलझूलनी एकादशी और नौका विहार उत्सव के रुप में धूमधाम से मनाया जाता है। कानपुर शहर के प्रसिद्ध जे.के. मंदिर कमला नगर में जून माह में कई वर्षो से चली आ रही नौका विहार उत्सव को मनाये जाने की परंपरा को इस वर्ष भी कायम रखते हुये धूमधाम से मनाया गया।
जिसमें मंदिर प्रागंण का मनमोहक और धरती पर स्वर्ग जैसा अद्भुद् दृश्य और लुभावनी सजावट ने शहरवासियों को बेहद आकर्षित किया। सांझ समय का वातावरण में धुधंलाती चांदनी की रौशनी श्रीराधा कृष्ण की धुनों पर भक्तिमय संगीत पर रिदम ग्रुप के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से श्रीकृष्ण के भक्तों को भावविभोर किया।
मंदिर प्रागंण के जलाशय में राधारानी के संग सुन्दर सुगंधित फूलों का श्रृंगार किये नौका में विराजित श्रीकृष्ण के दर्शन पाकर प्रांगण में मौजूद भक्तगण प्रफुल्लित हो उठे। इस अवसर पर पेड़ पौधों की हरियाली में टिमटिमाती रौशनी के बीच ऊंचे- ऊंचे जगमगाती रगं बिरंगी रौशनी से सजे झूलों में झूलकर बच्चे और यंगस्टर्स जे.के. मंदिर के नौका विहार उत्सव को अपने जीवन के यादगार उत्सव के रुप में कैद करके बेहद प्रसन्नता का अनुभव कर रहे थे।
….समाप्त………
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